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चाय और पकौड़े की महान बहस: कांगड़ा की एक बारिश भरी शाम


कांगड़ा की पहाड़ियों पर बादल छा चुके थे। हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गई थी और मौसम अचानक सुहाना हो गया था। ऐसे मौसम में लोगों के मन में एक ही ख्याल आता है – गरमा-गरम चाय और कुरकुरे पकौड़े।


द कोज़ी किचन में भी उस शाम कुछ ऐसा ही माहौल था। लेकिन अचानक एक अजीब बहस छिड़ गई।

बहस का विषय था –


बारिश के मौसम का असली हीरो कौन है – चाय या पकौड़ा?


चाय ने अपनी भाप छोड़ते हुए कहा,

"अगर मैं न होती, तो लोग ठंड से कांप रहे होते। मैं लोगों को सुकून देती हूँ, गर्माहट देती हूँ और हर थकान दूर कर देती हूँ।"


पकौड़ा मुस्कुराया और बोला,

"अच्छा? तो फिर लोग हमेशा कहते क्यों हैं – 'चाय के साथ पकौड़े ले आओ।' किसी को सिर्फ चाय से काम नहीं चलता।"


चाय थोड़ा चौंकी।


पकौड़ा आगे बोला,

"बारिश की पहली बूंद गिरते ही लोगों को मेरी याद आती है। आलू पकौड़ा, प्याज़ पकौड़ा, पनीर पकौड़ा... सबके मुंह में पानी आ जाता है।"


अब चाय की बारी थी।

उसने धीरे से कहा,

"ठीक है, लेकिन एक बात बताओ। क्या कभी किसी ने सिर्फ पकौड़े खाकर शाम बिताई है? आखिर में सब कहते हैं – 'भैया, एक कप चाय भी ले आना।'"


यह सुनकर पास बैठे ग्राहक हंस पड़े।


पकौड़ा कुछ देर चुप रहा।


तभी खिड़की के पास बैठे एक बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले,


"अरे भाई, तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो? चाय और पकौड़े का रिश्ता तो वैसा है जैसे कांगड़ा और धौलाधार, बारिश और मिट्टी की खुशबू, दोस्ती और मुस्कान।"


पूरा रेस्टोरेंट तालियों से गूंज उठा।


चाय और पकौड़े ने एक-दूसरे की ओर देखा और मुस्कुरा दिए।


उन्हें समझ आ गया कि असली मज़ा मुकाबले में नहीं, साथ में है।


तभी से हर बारिश भरी शाम में, कांगड़ा की ठंडी हवाओं के बीच, लोग एक कप गरमा-गरम चाय और कुरकुरे पकौड़ों का आनंद लेते हैं।


क्योंकि कुछ जोड़ियाँ भगवान खुद बनाता है।


और अगर कभी कांगड़ा में बारिश हो रही हो, तो द कोज़ी किचन जरूर आइए। यहां चाय और पकौड़ों की दोस्ती आज भी उतनी ही मशहूर है।

 
 
 

2 Comments

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Guest
Jun 19
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Chai and Bread Pakoda

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Guest
Jun 19
Rated 5 out of 5 stars.

Nice

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